Wipro ने human-AI operating model पर बढ़ाया दांव
Wipro ने अपने कारोबार में human-AI operating model पर दांव बढ़ाया है, जिसमें कर्मचारी और AI टूल एक ही कार्यप्रवाह का हिस्सा बनते हैं। भारतीय IT सेवा उद्योग के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि दशकों तक कारोबार का बड़ा हिस्सा मानव श्रम, बिल योग्य घंटों और बड़े इंजीनियरिंग समूहों पर आधारित रहा। जनरेटिव AI अब कोडिंग, परीक्षण, दस्तावेज और ग्राहक सहायता के कई हिस्सों को तेज कर रहा है।
नए मॉडल में AI को कर्मचारी का विकल्प मानने के बजाय सहायक प्रणाली के रूप में जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए डेवलपर शुरुआती कोड या टेस्ट केस AI से तैयार करा सकता है और फिर उसकी समीक्षा, सुरक्षा तथा ग्राहक की जरूरत के अनुसार बदलाव कर सकता है। इससे सामान्य काम का समय घट सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी मानव टीम के पास रहती है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर कौशल पर पड़ेगा। केवल किसी एक प्रोग्रामिंग भाषा की जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। कर्मचारियों को AI से सही निर्देश लेना, उसके आउटपुट की जांच करना, डेटा गोपनीयता समझना और जटिल कारोबारी समस्या को तकनीकी समाधान में बदलना सीखना होगा। कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर री-स्किलिंग इसलिए अनिवार्य बन रही है।
ग्राहकों की अपेक्षाएं भी बदल रही हैं। यदि AI किसी प्रोजेक्ट को कम लोगों और कम समय में पूरा कर सकता है तो ग्राहक पारंपरिक लागत स्वीकार नहीं करेंगे। इससे IT कंपनियों को परिणाम आधारित मूल्य निर्धारण, प्लेटफॉर्म और बौद्धिक संपदा आधारित सेवाओं की ओर जाना पड़ सकता है। बेहतर उत्पादकता का लाभ ग्राहक और सेवा प्रदाता के बीच कैसे बांटा जाएगा, यह महत्वपूर्ण कारोबारी सवाल है।
Wipro की रणनीति की असली परीक्षा वित्तीय नतीजों में होगी। यदि AI से डिलीवरी तेज होती है, गुणवत्ता सुधरती है और कंपनी नए प्रोजेक्ट जीतती है तो मॉडल सफल माना जाएगा। केवल कर्मचारियों के घंटे बचाना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय IT उद्योग अब उस चरण में है जहां AI प्रयोग से आगे बढ़कर ऑपरेटिंग मॉडल का हिस्सा बन रहा है, और अगले कुछ वर्षों में यही प्रतिस्पर्धा की दिशा तय कर सकता है।