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टेक्नोलॉजी

BRICS में AI ओपन-सोर्स सहयोग का नया प्रस्ताव

लेखक: Ratan Singhसंपादन: Rahul ShankarSeptember 13, 20269:05 am

BRICS देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में ओपन-सोर्स सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव तकनीक को लेकर समूह की नई प्राथमिकताओं को दिखाता है। विचार यह है कि सदस्य देश AI मॉडल, शोध, डेटा मानक और कंप्यूटिंग संसाधनों पर अधिक सहयोग करें ताकि उन्नत तकनीक कुछ चुनिंदा कंपनियों या देशों तक सीमित न रहे। भारत के लिए यह प्रस्ताव अवसर के साथ कई व्यावहारिक सवाल भी लेकर आता है।

ओपन-सोर्स AI का सबसे बड़ा लाभ यह है कि डेवलपर मॉडल को स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदल सकते हैं। भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए मॉडल तैयार करने में खुली तकनीक उपयोगी हो सकती है। सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में भी ऐसे मॉडल कम लागत पर स्थानीय समाधान विकसित करने का आधार बन सकते हैं।

लेकिन केवल मॉडल का कोड उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। आधुनिक AI के लिए शक्तिशाली चिप, बड़े डेटा सेट, बिजली और विशेषज्ञ इंजीनियर चाहिए। BRICS सहयोग तभी प्रभावी होगा जब सदस्य देश शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों को इन संसाधनों तक वास्तविक पहुंच दें। डेटा साझा करने के नियम भी कठिन होंगे क्योंकि हर देश की गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी नीतियां अलग हैं।

सुरक्षा दूसरा बड़ा मुद्दा है। खुले मॉडल नवाचार को तेज करते हैं, लेकिन उन्हें गलत इस्तेमाल के लिए संशोधित करना भी आसान हो सकता है। इसलिए सहयोग में मॉडल परीक्षण, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग के साझा मानकों की जरूरत होगी। किसी एक देश के नियम पूरे समूह पर लागू नहीं हो सकते, इसलिए न्यूनतम सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा।

भारत के लिए रणनीतिक फायदा यह है कि वह वैश्विक AI व्यवस्था में केवल तकनीक का उपभोक्ता न रहे। देश के पास बड़ा डिजिटल बाजार, सॉफ्टवेयर प्रतिभा और भाषाई डेटा है। यदि BRICS पहल ठोस परियोजनाओं में बदलती है तो भारतीय संस्थानों को वैकल्पिक AI पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल प्रस्ताव की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि राजनीतिक घोषणा के बाद वित्त, कंप्यूटिंग और शोध सहयोग के वास्तविक कार्यक्रम कितनी जल्दी बनते हैं।

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