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Kufri नेचर पार्क में तेंदुए के हमले से बुजुर्ग जानवर की मौत

लेखक: Vishwas Raiसंपादन: Rahul ShankarSeptember 13, 20269:06 am

कुफरी के नेचर पार्क में तेंदुए के हमले में एक उम्रदराज जानवर की मौत की घटना ने हिमाचल के वन्यजीव केंद्रों में सुरक्षा और पशु प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। पहाड़ी इलाकों में तेंदुओं की मौजूदगी स्वाभाविक है, लेकिन संरक्षित या घिरे हुए परिसर में दूसरे जानवरों तक उनकी पहुंच रोकने के लिए बाड़, निगरानी और रात की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।

घटना के बाद वन विभाग के लिए पहली प्राथमिकता यह समझना है कि तेंदुआ पार्क के उस हिस्से तक कैसे पहुंचा। यदि बाड़ में कमजोर स्थान, पेड़ की शाखा, नाला या कोई अन्य रास्ता इस्तेमाल हुआ हो तो उसे तुरंत सुरक्षित करना जरूरी है। कैमरा ट्रैप और रात की निगरानी से यह भी पता लगाया जा सकता है कि इलाके में एक से अधिक तेंदुए सक्रिय हैं या नहीं।

हिमाचल में मानव बस्तियों और जंगलों के बीच दूरी कई जगह बहुत कम है। भोजन की उपलब्धता, आवारा पशु और बदलते प्राकृतिक आवास के कारण तेंदुए कभी-कभी आबादी या पर्यटन स्थलों के करीब दिखाई देते हैं। इसका समाधान केवल जानवर को पकड़ना नहीं है; कचरा प्रबंधन, पशुधन की सुरक्षा और प्राकृतिक गलियारों को बनाए रखना भी जरूरी है।

नेचर पार्कों की भूमिका संरक्षण के साथ शिक्षा और पर्यटन की भी होती है। यहां आने वाले पर्यटक मानते हैं कि परिसर में रखे जानवर सुरक्षित हैं। इसलिए ऐसी घटना के बाद सुरक्षा ऑडिट और उसके निष्कर्षों पर कार्रवाई सार्वजनिक भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है। कर्मचारियों की रात की गश्त और आपात प्रतिक्रिया की प्रक्रिया की भी समीक्षा होनी चाहिए।

वन्यजीव विशेषज्ञ आम तौर पर तेंदुओं के साथ संघर्ष को कम करने के लिए वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर जोर देते हैं। कुफरी की घटना से सीख लेकर पार्क प्रशासन यदि कमजोर स्थानों को मजबूत करता है और आसपास के क्षेत्र में तेंदुओं की गतिविधि का नियमित रिकॉर्ड रखता है तो भविष्य में ऐसे हमलों का जोखिम कम किया जा सकता है।

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