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पर्यावरण

वनों पर बढ़ता दबाव, लकड़ी की वैश्विक मांग बनी नई चुनौती

लेखक: Vishwas Raiसंपादन: Pratigya MishraSeptember 13, 20269:06 am

दुनिया भर में लकड़ी, कागज, पैकेजिंग और निर्माण सामग्री की मांग बढ़ने से वनों पर दबाव को लेकर चिंता गहरी हो रही है। लकड़ी एक नवीकरणीय संसाधन हो सकती है, लेकिन तभी जब कटाई की गति पुनर्वनीकरण और प्राकृतिक वन संरक्षण के अनुरूप हो। अनियंत्रित कटाई जैव विविधता, जल चक्र और स्थानीय समुदायों की आजीविका पर लंबा असर डाल सकती है।

निर्माण उद्योग में स्टील और कंक्रीट के विकल्प के रूप में इंजीनियर्ड टिम्बर की लोकप्रियता बढ़ रही है। समर्थक इसे कम कार्बन वाला विकल्प मानते हैं क्योंकि पेड़ बढ़ते समय कार्बन सोखते हैं। लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हर तरह की लकड़ी स्वतः टिकाऊ नहीं होती। स्रोत, जंगल का प्रकार और कटाई के बाद पुनरोपण की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है।

कागज और पैकेजिंग की मांग भी बदल रही है। प्लास्टिक कम करने की कोशिश में कई कंपनियां कागज आधारित पैकेजिंग अपना रही हैं। इससे एक पर्यावरण समस्या का समाधान दूसरी संसाधन चुनौती पैदा कर सकता है यदि कच्चा माल जिम्मेदार स्रोत से न आए। प्रमाणित वन प्रबंधन और recycled fibre का इस्तेमाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारत में वनों का महत्व सिर्फ लकड़ी उत्पादन से नहीं है। हिमालय से लेकर मध्य भारत और पश्चिमी घाट तक जंगल पानी, मिट्टी संरक्षण और वन्यजीव गलियारों के लिए जरूरी हैं। कई आदिवासी और ग्रामीण समुदाय गैर-लकड़ी वन उत्पादों पर निर्भर हैं। इसलिए वाणिज्यिक मांग और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन स्थानीय अधिकारों को शामिल किए बिना संभव नहीं है।

समाधान मांग रोकना नहीं बल्कि आपूर्ति को टिकाऊ बनाना है। बेहतर ट्रेसिंग, अवैध कटाई पर कार्रवाई, वृक्षारोपण और प्राकृतिक वनों की सुरक्षा साथ-साथ जरूरी हैं। कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन का स्रोत स्पष्ट करना होगा और सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वृक्षारोपण को प्राकृतिक जंगल का विकल्प न माना जाए। बढ़ती वैश्विक मांग के दौर में वन नीति अब जलवायु नीति का भी केंद्रीय हिस्सा बन गई है।

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