कीमत बढ़ने के बावजूद त्योहारी मांग पर ऑटो कंपनियों की नजर
वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद ऑटो कंपनियों की नजर त्योहारी मांग पर है। कच्चे माल, तकनीकी अपग्रेड, सुरक्षा फीचर और नियामकीय जरूरतों ने कई मॉडलों की लागत बढ़ाई है, लेकिन कंपनियां उम्मीद कर रही हैं कि त्योहारों के दौरान खरीदारी की सकारात्मक भावना और फाइनेंस ऑफर ग्राहकों को निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
भारत में कार खरीद अक्सर लंबे समय की पारिवारिक योजना होती है। कुछ हजार रुपये की कीमत वृद्धि भी EMI पर असर डाल सकती है, खासकर एंट्री और कॉम्पैक्ट सेगमेंट में। इसी वजह से निर्माता सूची मूल्य बढ़ाने के साथ डीलर स्तर पर छूट, एक्सचेंज बोनस या कम ब्याज वाले ऋण की पेशकश कर सकते हैं। ग्राहक के लिए जरूरी है कि वह केवल छूट नहीं बल्कि ऑन-रोड कीमत और कुल ऋण लागत देखे।
SUV सेगमेंट अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है और ग्राहक अधिक फीचर तथा ऊंची ड्राइविंग पोजीशन के लिए अतिरिक्त कीमत देने को तैयार दिखे हैं। दूसरी ओर छोटी कारों में कीमत संवेदनशीलता अधिक है। यदि वित्त लागत और ईंधन खर्च बढ़ता है तो पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहक निर्णय टाल सकते हैं।
कंपनियों के लिए इन्वेंटरी प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है। त्योहार से पहले बहुत अधिक स्टॉक बनाना जोखिमपूर्ण है क्योंकि मांग उम्मीद से कम रही तो बाद में भारी छूट देनी पड़ सकती है। बहुत कम स्टॉक होने पर लोकप्रिय मॉडल की डिलीवरी देर से होगी और ग्राहक प्रतिस्पर्धी ब्रांड चुन सकता है। इसलिए उत्पादन और डीलर स्टॉक का संतुलन जरूरी है।
त्योहारी सीजन उद्योग को साल की दिशा समझने का अवसर देगा। यदि कीमत बढ़ने के बावजूद बुकिंग मजबूत रहती है तो यह उपभोक्ता भरोसे का सकारात्मक संकेत होगा। यदि बिक्री केवल छूट से आती है तो कंपनियों को अगले महीनों में सावधानी रखनी होगी। फिलहाल रणनीति साफ है: नए मॉडल, कई ईंधन विकल्प और फाइनेंस ऑफर के जरिए ग्राहक को शोरूम तक लाना।