त्योहारी सीजन से पहले ऑटो बिक्री में तेज उछाल
त्योहारी सीजन से पहले भारत के ऑटो बाजार में मांग बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। कार और दोपहिया कंपनियां नए मॉडल, सीमित अवधि के ऑफर और आसान फाइनेंस के जरिए ग्राहकों को शोरूम तक लाने की कोशिश कर रही हैं। भारत में त्योहारों के दौरान वाहन खरीद को शुभ मानने की परंपरा के कारण सितंबर से नवंबर का समय उद्योग के लिए बिक्री का महत्वपूर्ण दौर होता है।
इस बार कंपनियों के लिए स्थिति दिलचस्प है। पिछले वर्षों में सप्लाई चेन की कमी और लंबी वेटिंग अवधि बड़ा मुद्दा थी, लेकिन अब कई मॉडल आसानी से उपलब्ध हैं। इससे ग्राहक के पास अधिक विकल्प हैं और डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। जहां इन्वेंटरी अधिक है वहां नकद छूट, एक्सचेंज बोनस और कॉरपोरेट ऑफर बिक्री बढ़ाने के प्रमुख साधन बन सकते हैं।
SUV की मांग बाजार का बड़ा चालक बनी हुई है। कॉम्पैक्ट और मिड-साइज SUV में लगभग हर बड़ी कंपनी के मॉडल मौजूद हैं। साथ ही CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक विकल्पों की बढ़ती संख्या ग्राहकों को सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रखती। ईंधन खर्च और शहर में उपयोग का पैटर्न अब खरीद के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
फाइनेंस भी निर्णायक कारक है। अधिकांश निजी वाहन ऋण पर खरीदे जाते हैं, इसलिए ब्याज दर और EMI सीधे मांग को प्रभावित करते हैं। कंपनियां बैंकों और NBFC के साथ मिलकर कम डाउन पेमेंट या विशेष दरों की पेशकश कर सकती हैं, लेकिन ग्राहक के लिए कुल ऋण लागत समझना जरूरी है।
त्योहारी उछाल कितना टिकाऊ होगा, इसका पता सीजन खत्म होने के बाद चलेगा। यदि बिक्री केवल भारी छूट के कारण बढ़ती है तो अगले महीनों में मांग कमजोर हो सकती है। उद्योग के लिए बेहतर संकेत तब होगा जब ग्रामीण आय, रोजगार और उपभोक्ता भरोसा भी खरीद को समर्थन दें। फिलहाल कंपनियां साल के सबसे महत्वपूर्ण बिक्री दौर में बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं।