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उत्तराखंड

उत्तराखंड में भूस्खलन से कई सड़कें बंद, पहाड़ी जिलों में आवाजाही प्रभावित

लेखक: Vishwas Raiसंपादन: Ratan SinghSeptember 13, 20269:06 am

उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद होने से पहाड़ी जिलों में आवाजाही प्रभावित हुई है। मानसून के दौरान पहाड़ों में सड़क नेटवर्क अक्सर मलबे, पत्थर गिरने और सड़क धंसने से बाधित होता है। इसका असर केवल पर्यटकों पर नहीं बल्कि गांवों की रोजमर्रा की आपूर्ति, स्कूल, अस्पताल और स्थानीय कारोबार पर भी पड़ता है।

सड़क बंद होने पर प्रशासन की पहली प्राथमिकता यह तय करना होती है कि मार्ग को सुरक्षित तरीके से कब खोला जा सकता है। भारी बारिश जारी रहने पर मशीन से मलबा हटाना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है क्योंकि ऊपर से दोबारा पत्थर गिरने की आशंका रहती है। इसलिए कई बार यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग या मौसम सुधरने तक इंतजार करने की सलाह दी जाती है।

पहाड़ी राज्य में मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ हजारों किलोमीटर ग्रामीण सड़कें हैं। एक ही समय पर कई जगह नुकसान होने पर मशीन और कर्मचारियों की उपलब्धता चुनौती बन जाती है। महत्वपूर्ण मार्गों पर उपकरण पहले से तैनात करना प्रतिक्रिया समय घटा सकता है। मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने वाले क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस और ग्राम स्तर की सूचना प्रणाली भी जरूरी है।

यात्रियों को भारी बारिश के दौरान रात की यात्रा से बचना, आधिकारिक मौसम चेतावनी देखना और वाहन में पानी, दवा तथा जरूरी सामान रखना चाहिए। नदी या सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र के पास रुकना खतरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया पर पुराने सड़क बंद होने के संदेश भी घूमते रहते हैं, इसलिए तारीख और आधिकारिक स्रोत जांचना जरूरी है।

दीर्घकालिक समाधान सड़क खोलने की गति से आगे जाता है। वैज्ञानिक slope stabilisation, बेहतर ड्रेनेज और निर्माण मलबे का सही निस्तारण जरूरी है। हिमालय की संवेदनशील भूगर्भीय संरचना में हर सड़क को मैदान जैसी इंजीनियरिंग से नहीं बनाया जा सकता। जलवायु जोखिम बढ़ने के साथ उत्तराखंड को अपने सड़क नेटवर्क को अधिक resilient और मौसम-सूचना आधारित बनाना होगा। नियमित सुरक्षा ऑडिट और स्थानीय चेतावनी तंत्र इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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