मोदी-शी वार्ता में सीमा शांति और व्यापारिक रिश्ते केंद्र में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों में पिछले कुछ वर्षों से जारी सावधानीपूर्ण सुधार को नया राजनीतिक संकेत दिया है। BRICS शिखर सम्मेलन के इतर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, व्यापारिक रिश्तों को अधिक संतुलित बनाने और लोगों तथा कारोबार की आवाजाही आसान करने पर जोर दिया। शी की सात साल में यह पहली भारत यात्रा है, इसलिए बैठक को सामान्य द्विपक्षीय बातचीत से अधिक महत्व दिया जा रहा है।
भारत और चीन के रिश्ते 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव में चले गए थे। दोनों देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए और कई स्तरों पर सैन्य तथा कूटनीतिक वार्ताएं हुईं। 2024 के अंत में सैन्य गतिरोध कम करने की दिशा में सहमति के बाद संबंधों में धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ। इसके बावजूद सीमा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और दोनों पक्ष अब भी हिमालयी क्षेत्र में महत्वपूर्ण सैन्य मौजूदगी बनाए हुए हैं।
नई दिल्ली की बैठक में मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में स्थायी शांति द्विपक्षीय संबंधों के आगे बढ़ने की बुनियादी शर्त है। दोनों नेताओं ने सांस्कृतिक संपर्क, व्यापारिक संबंध और आवागमन बढ़ाने की जरूरत पर भी सहमति जताई। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राजनीतिक रिश्तों में सुधार के बावजूद दोनों देशों के कारोबारियों को वीजा, नियामकीय मंजूरी और औद्योगिक उपकरणों की आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में बाधाओं का सामना करना पड़ता रहा है।
व्यापार दोनों देशों के रिश्तों का सबसे बड़ा अवसर और सबसे कठिन सवाल भी है। 2025 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, लेकिन भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बहुत बड़ा बना हुआ है। भारत चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, औद्योगिक इनपुट और कई महत्वपूर्ण उत्पादों का बड़ा आयातक है, जबकि चीन को भारतीय निर्यात तुलनात्मक रूप से काफी कम है। बैठक में दोनों पक्षों ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन, सप्लाई चेन और बाजार तक अधिक भरोसेमंद पहुंच जैसे मुद्दों पर काम करने की बात कही।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति दोनों तेजी से बदल रहे हैं। भारत और चीन BRICS जैसे मंचों पर साथ काम करते हैं, लेकिन एशिया में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सीमा विवाद उनके रिश्तों को जटिल बनाए रखते हैं। नई दिल्ली में हुई मुलाकात से यह संकेत जरूर मिला है कि दोनों सरकारें मतभेदों को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक और कूटनीतिक संवाद बढ़ाना चाहती हैं।
अगली परीक्षा घोषणाओं के क्रियान्वयन की होगी। वीजा व्यवस्था, सीधी उड़ानें, निवेश और व्यापारिक मंजूरियों में वास्तविक सुधार दिखता है तो मौजूदा राजनीतिक गर्मजोशी आर्थिक संबंधों में भी दिखाई दे सकती है। लेकिन सीमा पर भरोसा बहाल किए बिना रिश्तों में किसी बड़े बदलाव की संभावना सीमित रहेगी।